कहीं छोड़ आइ थी
पर वो दबे पाँव वापस लौट आइं थी
उसने मुझे बहाना ये बताया
की मेरे ज़हन से अच्छा आशियाना न पाया
कलाइ पर जो लिखा था तेरा नाम
उस पर जब पड़ती है किसी की प्रश्न भरीं नज़र
लोगो को बातें बनाने के लिए मिलती होगी नई ख़बर
पत्थर से घिसने पर भी नहीं छूटता वो लहू में मिला रंग
तू ने पल-पल मरने की सजा दे दी
उस पर किसी फ़कीर ने मुझे
लम्बी हो जिंदगी ये दुआ दे दी
सब कुछ छोड़ कर तूने लम्बे सफ़र की तैयारी कर ली
और मुझे आँसुओं को न आने की ताकीद कर दी
अब तो हर लम्हा तेरी याद साथ है
शायद वो हाथ की लकीर बन गई है
ज़िंदगी जो क़बूल नही हुइ
वो दुआ बना गई है
