Sunday, 4 October 2020

पंक्तियाँ.. दिल से



 उसने पेपर पर 

और मैंने माँ के हाथ पर 

कर दिए दस्तखत 

और हमें मिल गयी 

अपने अपने हिस्से की दौलत 

~

हर दिन डरती थी 

तुम्हे खोने से 

पर अब देखो 

जब से तुम गए हो 

ये डर भी खामोशी से 

बिना बताये कहाँ चला गया

पता नहीं 

~

मेरी कब्र की मिट्टी 

आज कुछ नम है 

सुना है आज तू 

मेरी पसंद के 

रजनीगंधा के फूल 

लाने वाला था 

~

बहुत दिन के बाद 

मिल तो रहे हो 

पर मैं तुम्हारे जितना 

दौलतमंद नहीं 

कहीं ऐसा न हो 

चंद लम्हों के बाद 

तुम्हे कुछ 

ज़रूरी काम याद आ जाए 

50 comments:

  1. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  2. सुन्दर प्रस्तुति.

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  3. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  4. सादर नमस्कार ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (6-10-2020 ) को "उन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना. "(चर्चा अंक - 3846) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया मेरी रचना को चर्चा अंक में स्थान देने पर ।

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  5. उसने पेपर पर

    और मैंने माँ के हाथ पर

    कर दिए दस्तखत

    और हमें मिल गयी

    अपने अपने हिस्से की दौलत

    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर... लाजवाब।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  6. बहुत खूबसूरत।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  7. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  8. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 06 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मेरी रचना को सांध्य दैनिक मुखरित मौन में स्थान देने पर ।

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  9. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  10. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 7 अक्टूबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मेरी रचना को पाँच लिंको का आनंद में स्थान देने पर ।

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  11. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  12. कहीं ऐसा न हो
    चंद लम्हों के बाद
    तुम्हें कुछ
    ज़रूरी काम याद आ जाए

    –क्या बात है...
    –सुन्दर रचना सृजित

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया

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  13. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय ।

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  14. आदरणीया मधुलिका पटेल जी, नमस्ते👏! आपकी रचना बहुत भावपूर्ण है। पंक्तियाँ :
    मेरी कब्र की मिट्टी
    आज कुछ नम है
    सुना है आज तू
    मेरी पसंद के
    रजनीगंधा के फूल
    लाने वाला था । बहुत सुंदर है।
    मैंने आपका ब्लॉग अपने रीडिंग लिस्ट में डाल दिया है। कृपया मेरे ब्लॉग "marmagyanet.blogspot.com" अवश्य विजिट करें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराएं।
    आप अमेज़ॉन किंडल के इस लिंक पर जाकर मेरे कविता संग्रह "कौंध" को डाउनलोड कर पढ़ें।
    https://amzn.to/2KdRnSP
    आप मेरे यूट्यूब चैनल के इस लिंक पर मेरी कविता का पाठ मेरी आवाज में सुनें। मेरे चैनल को सब्सक्राइब करें, यह बिल्कुल फ्री है।
    https://youtu.be/Q2FH1E7SLYc
    इस लिंक पर कहानी "तुम्हारे झूठ से मुझे प्यार है" का पाठ सुनें: https://youtu.be/7J3d_lg8PME
    सादर!--ब्रजेन्द्रनाथ

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय

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  15. हर दिन डरती थी
    तुम्हे खोने से
    पर अब देखो
    जब से तुम गए हो
    ये डर भी खामोशी से
    बिना बताये कहाँ चला गया
    पता नहीं
    ...
    जो जितना प्रिय होता है उससे दूर होने का डर उतना ही गहरा होता है

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया

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  16. दिल से निकली हुई पंक्तियां हर दिल को छू रही है । अति सुंदर ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया

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  17. मेरी कब्र की मिट्टी

    आज कुछ नम है

    सुना है आज तू

    मेरी पसंद के

    रजनीगंधा के फूल

    लाने वाला था - - बहुत ही मर्मस्पर्शी कविताएँ हैं आपकी - - दिल की गहराइयों से निकली हुईं - - नमन सह।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय ।

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  18. मन को छूती बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति दी।
    सादर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया ।

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  19. बहुत सुन्दर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का आदरणीय

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  20. हर क्षणिका बिल्कुल दिल से निकली हुई । आप मेरे ब्लॉग पर आईं तो आपके ब्लॉग का पता मिला । पहली बार पढ़ा शायद । बहुत उम्दा लिखती हैं । आभार ।

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    1. आदरणीया आपका तहेदिल से शुक्रिया ।

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  21. आपने ब्लॉग को फॉलो करने के लिए कोई गैजेट नहीं लगाया । अब बताइए भला कैसे फॉलो करें ?

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    1. आदरणीया संगीता जी मेरी ब्लाग के सीधे हाथ की और फालो करने के लिए बनाया हुआ है ।इस अपने पन के लिए बहुत सारा स्नेह,।शुभकामनाएँ ।

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  22. आपके इस सुन्दर पटल के रसास्वादन से मैं अनभिज्ञ और वंचित रहा। पर अब जुड़ चुका हूँ और आह्लादित हूँ।
    सुन्दर रचनाओं हेतु साधुवाद आदरणीया।

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  23. आदरणीय सर तहेदिल से शुक्रिया आपका ।

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  24. सभी क्षणिकाएँ बहुत सुन्दर और भावपूर्ण, बधाई.

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका,आदरणीया प्रणाम

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  25. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया

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  26. आह ! मन को छू गईं ये पंक्तियां । अभिनंदन मधूलिका जी ।

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    1. आदरणीय तहेदिल से शुक्रिया आप का 🙏 ।

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