Showing posts with label ज़रूरतें. Show all posts
Showing posts with label ज़रूरतें. Show all posts

Monday, 10 August 2015

अश्क बहाना है मना



आज मेरी कलम ने किया है मना 
किसी की याद में अश्क बहाना है मना
आज कोइ नज्म नई बना
उस गली और मोड़ के शब्दों को ले 
जहॉं तू कभी खड़ा था अकेले
तब भी तो तू सुकून से जीता था 
आज फ़िर उन पुरानी राहों को नाप आ
जिनकी वीरानगी पर तू चलकर होता था ख़फ़ा
गम दे कर भूल जाना जिसकी फ़ितरत थी
तूने क्यों उसकी यादों को
सीने से लगाने की जरूरत की 
पुरानी यादों को रेज़ा-रेज़ा हो जाने दे
बेइन्तेहा बेकस हो कर डूब मत 
परेशांहाली में मयख़ाने के अंदर 
पैमाने मत तौल 
बाहर आ और ख़ुली फ़िजा में सांस ले 
चार कदम आगे बढ़ और ज़िदंगी को थाम ले 
आज मेरी कलम ने किया है मना 
किसी की याद में अश्क बहाना है मना

Saturday, 11 July 2015

मै कौन हूँ ?


मै कौन हूँ और क्या हूँ
क्या तुम मुझे हो जानते
बस चंद है मेरी ज़रूरतें 
किताब की दुकान देख रुक जाती हूँ 
अच्छे और सुंदर सफे लिए बिना रह नहीं पाती हूँ
सुंदर कलम तलाशती आँखें
सांसारिक रंग ढ़ंग कुछ नहीं आता 
बस कुछ लिख़ने के लिए एकांत मुझे है भाता 
सुकून मिलते ही 
मृगमरिचिका ख़ींचती है मुझे 
पानी की तलाश की तरह विषय ढ़ूँढती आँखें
सफेद वस्त्रों पर
काले मुखौटों पर 
इंसान के अंदर का जानवर या जानवर में छुपा इंसान
देश विदेश और समाज
वो मधुशाला और टूटते प्याले
नायिका का विरह 
नायक की मौत
आँसुओं का सैलाब 
वो बेवफ़ाइ का आलम 
क्या कुछ नही देखता अपनी अंदर की आख़ों से 
बेहतर सृजन की कोशिश में बीतता दिन 
अजनबी रुक जाओ
कैसी लगी मेरी रचना इतना बताते जाओ
मै तुम्हें नहीं जानती पर 
हमारी रचनाओं की आपस में गहरी दोस्ती है