बहुत सारे अक्श हैं देखे
वो तेरी मेरी उसकी आँख का पानी
सबकी अलग है कहानी
बचपन के मासूम मोती
जब आँखों में भर आएँ
माँ कुछ देर भी गर
आँखों से ओझल हो जाए
किशोरों की आँखें
अचानक से कब भर आएँ
व्याकुल मन का पंछी
पिंजरा तोड़ने को झटपटाए
युवा मन और ख़ामोश सिसकियाँ
एकांत में घंटों भिगोते सिरहाने
नाकामि, विरह, त्याग
अनगिनत कहानियाँ
एक प्रोढ़ आँखों के आँसू
बेटा चला गया विदेश
बेटी को बिदा किया परदेस
बड़े दिनों के बाद उनकी आती है जब चिठ्ठी
रुला जाते हैं उनके न आने के कारण
एक वृद्ध की आँख़ों के आँसू
सिर्फ आँसू ही आँसू
फर्श पर बेटे की मौत बिख़रि पड़ी
उसकी किरचें आँखों में है गढ़ी
औलाद का गम, जिसकी थी जीने की उम्र
कहीं जीवनसाथी अलविदा कह गया
अकेलेपन की सज़ा दे गया
इस उम्र का आँसू
जो सूखता भी नहीं
रुकता भी नहीं
और बहता भी नहीं

