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Saturday, 18 July 2015

केसी ये तेरी रज़ा



तूने कभी मुझे चाहा ही नहीं
पर तूने मुझे प्यार के भ्रमजाल में भरमाया तो सही
तेरी बातें कच्चे रंग सी धुल के निकली
तेरे वादे बिन पानी वाले बादलों से हल्के निकले 
सच्चे प्यार में तूने वफ़ा की आजमाइश की 
और तूने बेवफ़ाइ की हद पार की 
मैने तो अख़िरि सांस तक किया तेरा इतंजार
पर तूने तोड़ डाली मेरी आस की पतवार
प्रेम की परिभाषा पढ़ने के तेरे तरीके कभी थे ही नहीं सही
पर तूने मेरे मरने पर झूठा मातम मनाया तो सही
तू मेरी कबर पर आया तो बार-बार 
पर गुलाब में छुपा कर कांटे भी लाया हजार 
केसी ये तेरी रज़ा
देती रही मुझे हर पल सज़ा