मुझे लगा एक परी छुपी हुइ थी
जैसे बादलों की ओट में
तुम्हारी शरारतें वो चंचलता
तुम्हारा बचपन अभी बीता भी न था
और भाग्य दे गया बहुत सी चुभन
तुम में है अदभुत प्रतिभा
तुम हो सुंदरता की प्रतिमा
तुम्हारी ये सुइयों से दोस्ती
तुम हँस कर छिपा लेती हो
अपने आँखों के मोती
तुम्हारी उम्र के सुनहरे ख्वाब
और आगे बढ़ने का जज़्बा
तुम्हारा साहस और हिम्मत संग
रोज़ डायबिटीज़ से लड़ने की जंग
तुम्हारा युवा मन बहुत कुछ करना चाहता है
पर तुम्हारा भाग्य कुछ निणनय टालता भी है
हर रोज़ सुइयों की चुभन
और तुम्हारा कोमल तन
मेरे मन को एक एक सुइ से
गहरे भेदता जाता तुम्हारा तकलीफों वाला जीवन
तुम मेरा गम मुस्कुरा कर बाँटना चाहती हो
कहती हो माँ मेरे जैसे है लाखों बच्चे
पर क्या करूँ मैं एक माँ जो हूँ
मेरी बेटी १२ साल से टाइप वन डायबिटिक है...

