Wednesday, 15 April 2026

जब बारिश मुस्कुराई

आज बारिश बरसते हुए 

मेरे साथ मुस्कुराई 

उसने कहा, आज मैं 

आँखों के पानी की तरह 

नहीं बरसूँगी 

मुस्कुराहट के मोतियों सी 

बिखरुंगी 

कुछ ग़ज़ल सी गुनगुनाऊँगी 

खिड़की के शीशे पर 

देर तक ठहरूंगी 

तुम वही बैठ कर 

कुछ लिखना 

मैं तुम्हारी स्याही को 

नहीं फैलाउंगी 

पर आज तुम मुस्कुराना 

आज मैं तुम्हारे शहर से

दूर नहीं जाउंगी

तुम कॉफ़ी का मग 

खिड़की पर ही रखना 

भाप और ओस से 

धुंधले हुए शीशे पर 

अपनी अँगुलियों से

उन गुज़री हुई 

तारीखों को लिखना 

कब तुम्हारी मुस्कुराहट 

खिलखिलाहट में बदल गई 

और कब डायरी 

इंतज़ार शुरू और खत्म 

होने की तारीखों 

दिनों महीनों सालों की कहानी 

उन उजले सफों पर 

स्याही में तब्दील हो गई ...  

15 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शुक्रवार 17 एप्रिल, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीय सर तहेदिल से शुक्रिया आपका मेरी रचना को पाँच लिंकों के आंनद में स्थान देने पर

      Delete
  2. Beautiful 😍

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका

      Delete
  3. अरसे बाद लिखा आपने मधूलिका जी और क्या ख़ूब लिखा! मन सरस हो गया पढ़कर। बस यूँ ही लिखती रहिए।

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय

      Delete
  4. बहुत कोमल भावों से बुनी सुंदर रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया

      Delete
  5. मुस्कुराहट के मोतियों सी बिखरुंगी
    आँखों के पानी की तरह नहीं बरसूँगी
    कुछ लिखना , तुम्हारी स्याही नहीं फैलाउंगी …..

    सरस सुंदर रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय

      Delete
  6. बहुत सुन्दर, सरस अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीया

      Delete
  7. तहेदिल से शुक्रिया आपका

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय

      Delete