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Friday, 26 June 2015

एक पिता


पिता शब्द का अहसास 
याद दिलाता है हमें
की कोइ बरगद है हमारे आस -पास
जिसकी शीतल छाया में
हम बेफ़िक्र हो कर सो सकें
जीवन में गर आए कोइ दुख 
तो उन विशाल कंधों पर
सर रख कर
जी भर कर रो सकें
वो ऐसा मार्गदर्शक है 
जो पहले खुद उन रास्तों पर
चल कर अंदाज़ा लगाता है
की अगर जिंदगी में हम गिरे तो
क्या वो खाइ हमारा
आत्मविश्वास बचा पाएगी ?

दूरदर्शिता इतनी गहरी
क्या अच्छा अौर क्या बुरा 
वो हमारे जीवन का
एक दोस्त भी और एक प्रहरी
स्वप्न हम देखते आगे बढ़ने के
वो अपने छालो वाले हाथों से
गति देता हमारे पँजों को
जो उसने अपनी उम्र में संजोए थे ख्वाब
उनमें वो पंख लगाता है
हमारे लिए बेहिसाब
उसकी नींदे ख़ाली होती सपनो से
क्योंकि ?
कंधो पर ढेरों ज़िम्मेदारी 
सुला देती है नींद  गहरी और भारी