Saturday, 12 June 2021

तुम आओ तो सही ...

-1-

 मेरे दस्तावेज़ों में 

तू अब भी ज़िंदा है 

मैंने अपना 

अतीत और वर्त्तमान 

सब तेरे नाम की 

वसीयत में जो लिखा है 

~~~~~ 


-2-

इतनी रफ़्तार से 

तुम आशियाने मत बदलो 

दरवाज़े पे 

बस इतना लिख देना 

की तुमने अपने आप को 

तब्दील कर लिया है 

~~~~~ 


-3-

चलो आज झगड़ा 

हमेशा के लिए 

ख़त्म करते हैं 

बहुत सारी शिकायतें 

तुम रख लो 

नाकाम मोहब्बत का इल्ज़ाम 

मैं रख लेती हु 

~~~~~ 


-4-

तुम आओ तो सही 

मेरी कब्र पर एक बार 

दोनों शब्दों के अर्थ 

तलाशने नहीं पड़ेंगे 

एक खामोशी, दूसरा इंतज़ार ... 



23 comments:

  1. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (14-06-2021 ) को 'ये कभी सत्य कहने से डरते नहीं' (चर्चा अंक 4095) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय सर मेरी रचना को चर्चा अंक में स्थान देने पर ।

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  2. बहुत सुंदर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय

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  3. वाह ..... हर क्षणिका गज़ब .... और अंतिम तो बीएस वाह वाह .

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया ।

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  4. बहुत ही सुंदर सृजन।
    सादर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया,

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  5. मेरे दस्तावेज़ों में 

    तू अब भी ज़िंदा है 

    बहुत ही लाजवाब सृजन

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  6. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय । हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय,

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  7. बहुत त्रसुंदर कोमल कविताएं...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया,

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  8. वाह बहुत sunder !!हर क्षणिका लाजवाब!!शुभकामनायें

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया ।

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  9. लाजवाब और हृदयस्पर्शी क्षणिकाएं ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया ।

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  10. सुंदर क्षणिकाओं ने मन मोह लिया,बहुत श्भ्कामनाएँ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया ।

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  11. आपकी सभी क्षणिकाएं प्रभावशाली हैं मधूलिका जी। तीसरी वाली क्षणिका ने मुझे एक बहुत पुराना शेर याद दिला दिया:
    क्या सवाल तेरा है, क्या सवाल मेरा
    बस इसी अंधेरे ने रोशनी को घेरा
    मक़तब-ए-मुहब्बत में चल के मान लेते हैं
    कुछ क़ुसूर मेरा है, कुछ क़ुसूर तेरा

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय,।

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  12. नए अंदाज़ में बुने है चारों यादों के लम्हे ...
    बहुत प्रभावशाली ...

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय सर ।

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