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Friday, 16 June 2017

वो होली


वो खाकी शर्ट पर 
अब भी निशाँ होंगे 
पिछली होली के
वो अबीर का गुब्बार 
रंग कर चला गया था तुम्हे 
रंगो का इंद्रधनुष बिखेर गया था ख़ुशी 
गुलाल का रंग 
दहकते गालों में 
खो गया था 
तुम्हे रंगों की पहचान जो 
गहराइयों से थी 
अब के बरस 
बहुत सारा पानी भर था 
रंग नहीं 
वो तुम्हारी बातें 
झील सी आँखें
 रंग सारे तुम ले गए 
बस मेरे हिस्से का 
खारा पानी झीलों में
छोड़ गए 
वो शर्ट वो रंग के निशः 
वो होली 
बस गालों को भिगो गया 
खारा पानी 

Thursday, 24 September 2015

जीवन का मतलब


धीरे -धीरे जिंदगी से शिकायतों की गठरी भर ली 
उस गठरी से बहुत कुछ अच्छा
पीछे छूटकार बिख़रता गया
जिसे न बटोर पाए न वक्त से देख़ा गया 
अब जिंदगी बेतरतीबि से रख़े सामान की तरह हो गई है
मन करता है की काश?
जिंदगी रेशम पर पड़ी सिल्वटों सी होती 
मुट्ठी भर पानी के छीटें मारते 
प्रेस करते और नए सिरे से जीते 
या जिंदगी की इबारत 
कच्ची स्याही से लिखी होती 
अगर बारिश में भीग चुकी होती 
नए सफ़े से फ़िर शुरू होती
पर नहीं कुछ बदल पाते 
उन्ही सिलवटों में बाहर निकलने
का रास्ता ढूंढ़ते 
पक्की स्याही का रंग नहीं धुलता 
इसलिए जीवन में रंग सजाने की
कोशिश जारी रख़ते 
फ़िर से जीने की तमन्ना में
तमाम रातें मौत को गले मिलने का न्यौता देकर
धोख़े से रास्ता बदल लेते हैं
क्या करे सिलवटों और फ़ैली स्याही में 
जीने की आदत जो बरसों से पड़ी है
क्या इंसान वाकई जीवन का मतलब
सारी ज़िंदगी समझ नहीं पाते 

Thursday, 10 September 2015

यादों का बहाना



तेरी यादों को मैं झूठे बहाने बना कर 
कहीं छोड़ आइ थी 
पर वो दबे पाँव वापस लौट आइं थी 
उसने मुझे बहाना ये बताया
की मेरे ज़हन से अच्छा आशियाना न पाया
कलाइ पर जो लिखा था तेरा नाम
उस पर जब पड़ती है किसी की प्रश्न भरीं नज़र 
लोगो को बातें बनाने के लिए मिलती होगी नई ख़बर 
पत्थर से घिसने पर भी नहीं छूटता वो लहू में मिला रंग 
तू ने पल-पल मरने की सजा दे दी 
उस पर किसी फ़कीर ने मुझे 
लम्बी हो जिंदगी ये दुआ दे दी 
सब कुछ छोड़ कर तूने लम्बे सफ़र की तैयारी कर ली 
और मुझे आँसुओं को न आने की ताकीद कर दी 
अब तो हर लम्हा तेरी याद साथ है 
शायद वो हाथ की लकीर बन गई है 
ज़िंदगी जो क़बूल नही हुइ
वो दुआ बना गई है

Friday, 31 July 2015

तक़दीर का कैनवास


बड़े ही ख़ूबसूरत रंगों से भरा हुआ था
ज़िंदगी का कैनवास 
अचानक से सारे रंग छलक गए
वो मेरे सूर्तेहाल और मुसतकबिल को 
पूरा का पूरा भिगो गए 
अब नया कैनवास है 
उसके लिए नहीं बचा कोइ रंग 
नया कैनवास मेरे वजूद की 
पहचान बन गया है 
डर लगता है 
रंगो को छूने में, क्योंकि?
छलके थे जब सारे रंग 
मिलकर बन गए थे स्याह रंग 
जिससे बनती है ख़ौफ़नाक तस्वीर
जिससे लिखी जाती है 
एक अपमान वाली भाषा 
जिससे बनती है भयानक आँखें
जो बंद दरवाजे के बाद भी घूरती रहती है 
उस कैनवास में अब
बिना रंगो वाली तस्वीर बन गई है 
जिसमें नजर आते है 
हिरास, बदर्जए-मजबूरी, बदरौनक और हिज्र 
उस कैनवास को स्याह रंगों से बचा कर रखना
बमुशिकल है ।

Saturday, 18 July 2015

केसी ये तेरी रज़ा



तूने कभी मुझे चाहा ही नहीं
पर तूने मुझे प्यार के भ्रमजाल में भरमाया तो सही
तेरी बातें कच्चे रंग सी धुल के निकली
तेरे वादे बिन पानी वाले बादलों से हल्के निकले 
सच्चे प्यार में तूने वफ़ा की आजमाइश की 
और तूने बेवफ़ाइ की हद पार की 
मैने तो अख़िरि सांस तक किया तेरा इतंजार
पर तूने तोड़ डाली मेरी आस की पतवार
प्रेम की परिभाषा पढ़ने के तेरे तरीके कभी थे ही नहीं सही
पर तूने मेरे मरने पर झूठा मातम मनाया तो सही
तू मेरी कबर पर आया तो बार-बार 
पर गुलाब में छुपा कर कांटे भी लाया हजार 
केसी ये तेरी रज़ा
देती रही मुझे हर पल सज़ा

Monday, 8 June 2015

अधूरी कहानी


सब रंग भर दिए पर तस्वीर अभी अधूरी है 
बातें बहुत कही और सुनी हमनें 
पर मुलाकात अब भी अधूरी है
मंजिल तक जाना मजबूरी थी
पर सफ़र अब भी अधूरा है
अधूरी तस्वीर पूरी करदो
रेत पर बनी है तस्वीर
इसे पानी के रंग से भर दो
मुलाकात अब पूरी कर दो
कहानी जो अधूरी थी
उसे मुझे सुनने वाले
शब्दों से भर दो 
उस मजिल तक
तुम साथ जाना चाहते थे
अब आ भी जाओ
तुम्हारे इंतज़ार में
सफर के बीच में
जहाँ रुकी थी मैं
उस खाली स्थान को भर दो 
इस आत्मा को
शरीर के बंधन से मुक्त कर दो
रेत की तस्वीर थी
पानी का रगं था
लहरें उसे अपने साथ वापिस ले गई 
ढूंढ़ती रही आँखें पुराने निशान
तस्वीर, मुलाकात, मंज़िल
कुछ नहीं था दूर तक बस एक खामोशी 
लहरों की हल चल और पक्षियों का कलरव |