Saturday, 6 November 2021

कुछ पंक्तियाँ दिल से


~ 1 ~

 तरक्की की वो दौड़ 

हर मायने खो देती है जनाब 

जिसमें माँ - बाप का हाथ 

उनके बच्चों से छूटता जाए 


~ 2 ~

वक़्त ने सीखा और समझा दिया 

बहुत सी भीड़ रही अपनों की 

पर सारी ज़िन्दगी

अकेले ही चलते रहे


~ 3 ~

शहर में बड़ी चहल पहल है 

लग रहा है खूब बिक रही हैं मेरी यादें 

तूने उसकी बोली 

बड़े सस्ते दामों में जो लगा दी 


~ 4 ~

मैंने कहा चली जाओ 

मेरी ज़िन्दगी से 

पर वो कहाँ मानने वाली थी 

तेरी यादें 

तेरी तरह उनको भी 

अड़े रहने की 

पुरानी आदत जो ठहरी 


~ 5 ~

मेरी खामोश यात्रा का वो मुसाफिर 

बात कुछ भी नहीं हुई 

पर पता नहीं क्यों 

आज तक उसके किस्से 

ख़त्म ही नहीं हो रहे


~ 6 ~

मेरे दुपट्टे के हर मकेश के साथ

धागे की जगह 

तुम्हारी यादें टकी हुई हैं 

कल मैं गइ थी 

कारीगर के पास 

मकेश निकलवाने 

उसने कहा इन्हे उधेड़ने से 

सब कुछ तार - तार हो जाएगा 

41 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति.

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय

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  3. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 08 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीया मेरी रचना को पाँच लिंकों का आनंद में स्थान देने पर ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय ।

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  6. मैंने कहा चली जाओ

    मेरी ज़िन्दगी से

    पर वो कहाँ मानने वाली थी

    तेरी यादें

    तेरी तरह उनको भी

    अड़े रहने की

    पुरानी आदत जो ठहरी
    यादें न गतयी या जाने ना दिया
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया

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  8. मैंने कहा चली जाओ

    मेरी ज़िन्दगी से

    पर वो कहाँ मानने वाली थी

    तेरी यादें

    तेरी तरह उनको भी

    अड़े रहने की

    पुरानी आदत जो ठहरी..बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति । हम छोड़ने को तो बहुत कुछ छोड़ सकते हैं,पर ये जो यादों का पिटारा है,वो तो साथ ही चलता है ।

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीया,

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  9. बेहतरीन भावाभिव्यक्ति । आपका सृजन दिल के बहुत करीब लगा।

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीया

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  10. एक-एक अशआर दिल में कहीं गहरे तक उतर गया। और आख़िरी मुक्तक का तो कहना ही क्या? तारीफ़ भी की जाए तो कितनी की जाए?

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय,

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  11. बहुत सुन्दर सृजन

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  12. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय आपका

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  13. जीवन अनुभवों को बहुत मर्मस्‍पर्शी रूप में प्रस्‍तुत किया है आपने
    जीवन के गुणा-भाग को कुछ तो बहुत बाद में लेकिन समझ तो जाते है, लेकिन कई ऐसे भी होते हैं जो ताउम्र दुनियादारी समझ ही नहीं पाते हैं

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    1. आपने ठीक कहा कविता जी। कई ऐसे भी होते हैं जो ताउम्र दुनियादारी नहीं समझ पाते। ऐसे लोगों के लिए ही यह शेर कहा गया है:
      अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया
      ज़िंदगी छोड़ दे पीछा मेरा, मैं बाज़ आया

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    2. कविता जी आपका तहेदिल से शुक्रिया ,

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    3. जितेंद्र जी आप का तहेदिल से शुक्रिया,

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  14. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीया,

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  15. वाह! बड़ी गहराई तक पैठ जाने वाली अत्यंत प्रभावोत्पादक पंक्तियाँ!!! स्याही का रंग यूँ ही गढियाता रहे। शुभकामनाएं और बधाई!!!

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  16. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय.

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  17. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय.

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  18. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय.

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  19. बहुत सुंदर काव्य सृजन।हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय

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  20. सार्थक लघु रचनाएं, हृदय तक उतरती, सुंदर सृजन।

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय

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  21. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय.

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  23. खूबसूरत क्षणिकाएँ।

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    1. तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय.

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  24. बहुत सुंदर पंक्तियाँ।

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  25. हर क्षणिका बहुत गहरी ...
    जीवन के गूढ़ अनुभव जैसे शब्द बन कर उतर गए हों किसी कागज़ पर ...
    अंतिम वाली तो सीधे दिल में जाती है ... सच है की यादों के मनके सब कुछ उधेड़ देंगे पर निकलेंगे नहीं ...

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