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Saturday, 16 September 2023

बारिश का मौसम आ गया



बहुत अरसों से पहली बारिश में भीगा करती थी 

अपने चेहरे को ऊपर करके

दोनो हथेलियों को खोल कर 

पता नहीं क्यों वो भीगना

मुझे बहुत ही सुकून देता 

वो भीगने का सिलसिला 

साल दर साल चलता रहा 

बारिश का मौसम आता

और मेरे अंतर मन के 

घुटन के सारे सैलाब को 

बह ले जाता ।

आँखों के कोरों के मोतियों को 

अपनी बूँदों में मिलाने का जादू 

बारिश को ही आता है ।

मेरे ज़हन को हल्का करके 

वो मोती कहीं किसी

सीप में बंद हो जाते होंगे ।

बहुत ही ज़हीन सा लफ़्ज़ है बारिश

बड़ा इंतेज़ार रहता है 

पहली बारिश का 

बूँदे और बारिश कि आवाज़ 

घंटों सुनते रहने के बाद भी 

पहली मुलाक़ात सी नई लगती है 

इस बरस भी 

बारिश का मौसम आने वाला है 

भीगना है मुझे क्योंकि 

पिछली बारिश की बूँदों

के निशान को मिटाने

गुज़रे हुए लम्हों को मिट्टी में दबाने 

नई बूँदें आयी हैं 

बारिश का मौसम आ गया ।

Monday, 25 May 2015

इंतज़ार


हालातों ने उसकी खुशी को
कही दफ़ना दिया
उससे छीन कर उसकी मुस्कुराहट को
कहीं छिपा दिया
चाहती थी वो सूरज की किरनों से पहले
दौड़ कर धरा को छू लू
गुन-गुनी धूप सी गरमाइश
हाथों में हुआ करती थी
जाड़े में गुलमोहर के नीचे
इंतज़ार खत्म होता था
और सर्द हवाओं में
काँपते उसके हाथ 
होते थे तुम्हारे हाथों में
वो गरमाइश अब बर्फ हो गई 
वो कभी न खत्म होने वाली
बातों का सिलसिला
अब कभी-कभी कानों मे
कहीं दूर गूंजता सा है
वो तुम्हारी उपमा
सुबह के सूरज की आभा
चहरे से बहुत दूर हो चली है
अब माथे पर लकीरें हैं
पगडंडियों की तरह
जिनमें खो कर अपने आप को ढूँढना
बहुत मुश्किल है
वो झुके हुए कंधे और बढ़ता हुआ बोझ
पुराने वक़्त को किसी खोए हुए सिक्के की तरह
ढूँढती है आँखें ।