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Saturday, 16 September 2023

बारिश का मौसम आ गया



बहुत अरसों से पहली बारिश में भीगा करती थी 

अपने चेहरे को ऊपर करके

दोनो हथेलियों को खोल कर 

पता नहीं क्यों वो भीगना

मुझे बहुत ही सुकून देता 

वो भीगने का सिलसिला 

साल दर साल चलता रहा 

बारिश का मौसम आता

और मेरे अंतर मन के 

घुटन के सारे सैलाब को 

बह ले जाता ।

आँखों के कोरों के मोतियों को 

अपनी बूँदों में मिलाने का जादू 

बारिश को ही आता है ।

मेरे ज़हन को हल्का करके 

वो मोती कहीं किसी

सीप में बंद हो जाते होंगे ।

बहुत ही ज़हीन सा लफ़्ज़ है बारिश

बड़ा इंतेज़ार रहता है 

पहली बारिश का 

बूँदे और बारिश कि आवाज़ 

घंटों सुनते रहने के बाद भी 

पहली मुलाक़ात सी नई लगती है 

इस बरस भी 

बारिश का मौसम आने वाला है 

भीगना है मुझे क्योंकि 

पिछली बारिश की बूँदों

के निशान को मिटाने

गुज़रे हुए लम्हों को मिट्टी में दबाने 

नई बूँदें आयी हैं 

बारिश का मौसम आ गया ।