Sunday, 4 October 2015

पत्थर बोलते नहीं


जब तुम गए मैने देख़ा ही नहीं 
क्या -क्या अपने साथ ले गए
अब मेरा बहुत सा सामान नहीं मिला रहा 
ज़्यादा कुछ नहीं बस दो चार चीज़े हैं 
मैने तुम्हें हर उस जगह पर तलाशा जहाँ तुम हो सकते थे
एक मेरा विश्वास; एक मेरी परछाई
मेरी अंतर आत्मा; मेरे शब्द 
पर तुम कहीं नहीं मिले 
मेरा सामान तो लौटा जाते 
इस बिख़रि हुइ जिंदगी को समेटने के लिए
जो तुम ले गए वो विश्वास चाहिए 
इस जीवन के कोरे कागज को 
लिख़ने के लिए वहीं शब्द चाहिए 
मेरी अंतर आत्मा बहुत ख़ामोश है
उसका मौन तोड़ने के लिए वार्तालाप का प्रहार चाहिए 
मुझे तो नहीं पर हाँ मेरी परछाइँ को आदत थी
तुम्हारे साए से रूठने और मनाने की  
उस परछाइँ को हो सकता है इतंज़ार हो 
कह दो कि तुम मेरा सामान तो लौटाने आओगे एक बार 
इंतज़ार करती आँख़ें पथरा जरूर गई हैं
पर अब ये तुम्हें नहीं रोकेंगी रोड़ा बन 
क्योंकि पत्थर बोलते नहीं

111 comments:

  1. बेहद सुन्दर रचना

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का मुकेश कुमार जी ।

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, संत कबीर के आधुनिक दोहे - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत बहुत आभार आपका मेरी रचना को ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने का ।

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  3. अत्यंत हृदयस्पर्शी रचना है

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    1. बहुत बहुत आभार आपका मालती जी ।

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  4. अत्यंत हृदयस्पर्शी रचना है

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    1. शुक्रिया आपका मालती जी ।

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  5. दिल को छू लेने वाली रचना ! अति सुन्दर।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका राजेश कुमार जी ।

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  6. दिल को छू लेने वाली रचना ! अति सुन्दर।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका राजेश कुमार जी ।

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  7. अपने जितने दूर होते हैं उन्हें हम उतने करीब तलाशते है.… एक उम्मीद हर हाल में बांधे रखती है हमें...
    मर्मस्पर्शी रचना

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    1. बहुत बहुत आभार आपका कविता जी ।

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    1. जी शुक्रिया आप का ।

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  9. बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना.
    नई पोस्ट : दिल मचल गया होता

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का राजीव कुमार जी ।

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  10. बहुत सुन्दर रचना....|

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका रितेश जी । मेरी रचना को पढ़ने और सराहने का ।

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  11. pthar bina bole bhi bahut kuch kahte hain.. apki kvita ki tarah

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका अरूण जी मेरी रचना को पढ़ने और सराहने के लिए.

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका अरूण जी मेरी रचना को पढ़ने और सराहने के लिए.

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  12. बहुत सुन्दर रचना....|

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका जमशेद आज़मी जी.

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  13. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 16 अक्टूबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का यशोदा जी मेरी रचना को स्थान देने का ।

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  14. गहरी अभिव्यक्ति

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मोनिका जी ।

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  15. भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  16. मन को छूती गहन अभिव्यक्ति
    सादर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  17. क्या खूब लिखा है..!! लाजवाब..!!!

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  18. बहुत बहुत शुक्रिया आपका संजय जी

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  19. बहुत सुंदर और भावपूर्ण। दुर्गा पूजा और दशहरे की शुभकामनाएँ।

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  20. बहुत बहुत शुक्रिया आपका हिमकर जी.

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  21. बहुत भावपूर्ण मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति...

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    1. बहुत बहुत आभार आप का ।

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  22. सुन्दर प्रस्तुति...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ज्योति जी.

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  23. सुन्दर प्रस्तुति...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ज्योति जी.

      Delete
  24. सुन्दर प्रस्तुति...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का ।

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  25. क्या बात है !.....बेहद खूबसूरत रचना....
    आप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)

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  26. बहुत बहुत शुक्रिया आप का ।

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  27. सुन्दर रचना ......
    मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा है |

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/
    http://kahaniyadilse.blogspot.in/

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ऋषभ जी आप की ब्लाग जरूर पढूंगी।

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  28. मन पथराया... बहुत उम्दा अभिव्यक्ति, बधाई.

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  29. सुंदर रचना ...शुभकामनाएँ !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  30. दर्दनाक अभिव्यक्ति ....
    मंगलकामनाएं !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका |

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  31. बहुत उम्दा |

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  32. This comment has been removed by a blog administrator.

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    1. This comment has been removed by the author.

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  33. बेहद भावपूर्ण और मर्मस्पर्शी .

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया रीता जी ।

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  34. बहुत बढिया....,..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका कौशल लाल जी ।

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  35. निसंदेह उत्तम रचना
    Quotes Greetings

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका क्रितिकिया जी .

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  37. बहुत बहुत शुक्रिया जी ।

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  38. This comment has been removed by the author.

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  39. अति भावपूर्ण प्रस्तुति। धन्यवाद मधुलिकाजी ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का संपत कुमारी जी ।

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  40. मधुलिका जी ,

    आपके ब्लॉग पर पहली बार आना हुआ है ....आपकी यह अभिव्यक्ति बड़ी अपनी सी लगी .... लगा कि कहीं न कहीं ये भाव मेरे मन में भी घुमड़ रहे हों ...उसका मौन तोड़ने के लिए वार्तालाप का प्रहार चाहिए ..... संवादहीनता ही मन को प्रस्तर बना देती है .... गहन अभिव्यक्ति ....

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का संगीता जी मेरी रचना को पढने और सराहने का ।

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  41. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का महेश जी ।

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  42. भावपूर्ण रचना..सुन्दर जी

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का कंचनलता जी ।

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  43. पत्थर भी बोलेंगे, बस लिखते रहो।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका गिरधारी खंकरियाल जी मेरी रचना को पढ़ने और सराहने का.

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  44. विश्वास का लौट आना जरूरी है ... बस एक यही सबसे जरूरी सामान है जो कहीं नहीं मिलता ... गहरे भाव लिए शब्द ...

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  45. बहुत बहुत शुक्रिया आप का दिगम्बर सर जी । मेरी रचना को पढने और सराहने का ।

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  46. भावभीनी रचना । मेरा कुछ सामान....गाने की याद दिला गई। बधाई।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आशा जी मेरी रचना की तारीफ के लिए.

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  47. मेरे ब्लॉग पर आने का आभार।

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    1. आपका भी शुक्रिया

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  48. इंतज़ार करती आँख़ें पथरा जरूर गई हैं
    पर अब ये तुम्हें नहीं रोकेंगी रोड़ा बन
    क्योंकि पत्थर बोलते नहीं----- अदभुत

    मन को मथती कमाल की अनुभूति
    सादर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ज्योति खरे जी मेरी रचना की तारीफ करने का.

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  49. कविता पढकर पत्थर भी बोल जायेंगे। भावपूर्ण रचना है।
    मेरी कविताएं भी पढकर देखें .....अब खून भी बहता नहीं, पर जख्म भी बढते गये,
    और दर्द शायरी में , उतरता चला गया .........click on http://manishpratapmpsy.blogspot.com

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मनीष जी. आप की रचनाएँ जरूर पढूगीं.

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  50. कविता पढकर पत्थर भी बोल जायेंगे। भावपूर्ण रचना है।
    मेरी कविताएं भी पढकर देखें .....अब खून भी बहता नहीं, पर जख्म भी बढते गये,
    और दर्द शायरी में , उतरता चला गया .........click on http://manishpratapmpsy.blogspot.com

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मनीष जी.

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  51. जब विश्वास चला जाता है...तब मौन छा जाता है, आँखें पथरा जाती हैं.. मगर भीतर शोर बहुत होता है...
    बहुत भावपूर्ण रचना ! बधाई आपको!

    ~सादर
    अनिता ललित

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका अनिता जी.

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका अनिता जी.

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  52. अनुपम प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  53. ब्लॉग मे स्तरीय कवितायें पढ़ पढ़ कर , किसी नए ब्लॉग मे बड़े अनमने मन से गया , मगर आपकी इस कविता ने मन झकझोर दिया , चलती फिरती भाषा मे सब कुछ लिख दिया आपने, समवेदनाओं की और भावों की बेजोड़ प्रस्तुति , बधाई

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  54. Madhulika Patelजी ब्लाग पर आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ...और दिली शुक्रिया इस लिए भी ....की आपकी राह आपके ब्लाग तक आ सका.....बा-कमाल बहुत सुंदर कलम है आपकी !! उसका मौन तोड़ने के लिए वार्तालाप का प्रहार चाहिए"...वाह..!!

    साभार
    हर्ष महाजन

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मेरी ब्लॉग पर आने का । मेरी रचना को पढने और सराहने का । आभार ।

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  55. गहरे भाव लिये सुंदर प्रस्तुति।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  56. kyaa baat hai.. very nice poem.. arz kiyaa hai,

    जज़्बात के लहरों पर
    तूफ़ान का था ये मौसम
    जो तुझको न छू पायी
    क्या इतनी हवा थी कम
    -kaunquest (www.kaunquest.com)

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  57. Behad Khubsurat and marmasparshi...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका पुष्पेन्द्र गंगवार जी ।

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  58. मधुलिका जी, 'कुछ अलग सा' पर सदा स्वागत है आपका

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका गगन जी मेरी ब्लॉग पर आने का ।

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  59. किसी अपने के जाने पे ये सब स्वाभाविक ही चला जाता है ... दिल को छूते भाव

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    1. तहे दिल से शुक्रिया दिगम्बर नसवा सर जी ।

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  60. बहुत सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का सावन कुमार जी ।

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