Showing posts with label लाचारी. Show all posts
Showing posts with label लाचारी. Show all posts

Wednesday, 6 April 2016

रोटी


ऊँचा पद बढ़ता रौब
कुर्सी का रुतबा
अधिनस्तोकी फ़ौज
जोड़ते हाथ विनती के
घुटता दम मरता स्वाभिमान
आस और उम्मीद
किस चीज की
पेट की आग बुझाने वाली
बरसात रोटी और पैसा
बहुत नीचे खड़ा है वो
पता नहीं दिखेगा भी की नहीं
उसकी विनती और लाचारी वाला कद
बहुत ही न्यून है
कुर्सी से उसे उम्मीद बहुत है
दोनों हाथो को जोड़ते वक्त
अपने स्वाभिमान को
पैरो तले रौंदता हुआ पाता है
सब कुछ समेट लेता है
गाँव परिवार झोपड़ी
जिम्मेदारी बीमारी
उन्हीं दो हाथों में उसकी विनती के अंदर
चार पैसों की आस वाली नौकरी
कुर्सी की आँखें बहुत घाघ हैं
वो देखना चाहती हैं की कितना कुछ खून
निचोड़ा जा सकता है
चंद पैसों के बदले 

Wednesday, 20 May 2015

अरुणा शानबाग को श्रद्धांजली



जिस्म ने अपनी
हल - चल खो दी थी  
पर आत्मा अब भी
जंग लड़ रही थी
कानो में पिघल रहा था
लाचारी बेबसी और  
भयानकता का शोर
जिस मोड़ पर देखे थे
सुनहरे सपने  
मन के अंधेरे कोने में
बंद पड़े थे
आत्मा ने बहुत कोशिश की
इन बेजान सांसो में
फिर खुशियाँ भर पाँऊ
मन के अंधेरे कोने में
बंद पड़े सुनहरे सपनों
की गठरी को
खोल कर सजाया भी
उसके सामने, पर
हालात से चोट खाया जिस्म
आत्मा के मोह में नहीं आया
वह अपने सुनहरे सपनों को लेकर
वापस ज़िन्दगी की ओर
मुड़ नहीं पाया ।

Thursday, 14 May 2015

वृद्धावस्था की तैयारी


वृद्धावस्था की तैयारी 
कर्मों का लेखा जोखा
शारीर नहीं दे कहीं धोखा
सहारे वाले हाथ नहीं हैं
अब बच्चों व रिश्तेदारों की बारात नहीं है
अकेली सुबह है
खाली और काली संध्या है
सन्नाटे बन गए कान के बाले
लटक-लटक कर शोर करते हैं
आराम कुर्सी है हिलने वाली
कुर्सी स्थिर है हिल रहा शारीर
कितनी लाचारी और बेबसी 
आँखें दूसरों से
आस और अपनापन मांगती सी
टूटती उम्मीद बुझती लौ
बिखरते सपने टूटे कांच से
एक - एक नश्तर चुभता दिल पे
प्राण रखे हैं बीच में दो सिल के
धीरे - धीरे सब कुछ घुटता जाता है
क्या खोया क्या पाया
कुछ भी समझ न आया
भारी मन, हाथ खाली है
चलो अब वृद्धावस्था की तैयारी है
शांत वन में सहारे वाली लकड़ी की ठक - ठक
लड़खड़ाते कदमों की धक - धक
बिन आंसू रोती आँखें
शून्य में खो जाती हैं
बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापा
शान्त मन रहता, अब नहीं खोता आपा
जीवन की संध्या में कल के सूरज की आस नहीं है 
अब तो बस वृद्धावस्था की तैयारी |