Thursday, 31 December 2015

मुखौटों का शहर


तुम इतना तेज मत चलो 
इतने आगे निकल तो गए हो 
पर कम से कम पल दो पल तो रुको 
रुख कर चलने के बीच 
इतना वक्त तो हो मेरे मीत
इंतज़ार जो तुमने किया हो मेरे लिए 
उसका मुझे अहसास तो हो 
मेरे प्यार में इतना हो दम 
मेरे इंतज़ार में थम जाए तुम्हारे कदम 
तुम्हारी आगे बढ़ने की चाह 
बदल देगी हमारी राह 
बहुत ऊँचाई तक तुम पहुंच गए हो
अगर तुम मुझे हाथ बढ़ा कर थामते
मैं भी उन उचांइयो को महसूस करती 
अब खत्म सी हो रही है कदमों की समानता 
हाथ की ठंडक से पता चल रही है 
रिश्तों की गर्माहट 
सुनहरे सपनों में उलझ कर बहुत दूर निकल गए 
बीच में वक्त के थफेड़ों ने
मिटादी पुरानी यादों की कहानी
आख़रि पड़ाओं पर 
हमारी मुलाकात वास्तविक नहीं थी 
बातों और मुलाक़ातों से ही समझा 
की आगे यात्रा
मिटा देगी मेरा अस्तित्व, क्योंकि?
अब तुम मुखौटों के शहर में
जो आ गए हो 
जहां कदम कभी थकते नहीं 
एक दूसरे का पीछे छोड़ने की चाह में 
सांस लेने को भी लोग रुकते नहीं

24 comments:

  1. सुन्दर भावों से सजी कविता।बहुत खूब।
    नव वर्ष की शुभकामना।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका राजेश कुमार जी । मेरी रचना को पढने और सराहने का । आप को भी नव वर्ष की शुभ कामनाए ।

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  2. सुन्दर भावों से सजी कविता।बहुत खूब।
    नव वर्ष की शुभकामना।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका राजेश कुमार जी.

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-01-2016) को "2016 की मेरी पहली चर्चा" (चर्चा अंक-2209) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत बहुत शुक्रिया आप का शास्त्री जी मेरी रचना को चर्चा अंक में स्थान देने का ।

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  5. बेहतरीन प्रस्तुती, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका राजेंद्र कुमार जी.

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    2. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं.

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  6. सुन्दर प्रस्तुति ..
    आपको भी सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका कविता जी. आपको भी सपरिवार नववर्ष की शुभकामनाएं.

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  7. अगर तुम मुझे हाथ बढ़ा कर थामते
    मैं भी उन उचांइयो को महसूस करती
    अब खत्म सी हो रही है कदमों की समानता
    हाथ की ठंडक से पता चल रही है
    रिश्तों की गर्माहट
    सुनहरे सपनों में उलझ कर बहुत दूर निकल गए
    बीच में वक्त के थफेड़ों ने
    मिटादी पुरानी यादों की कहानी

    behtreen prastuti ... nav varsh ki ashesh shubhkamnaye :)

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका सुनिता जी आपको नववर्ष की शुभकामनाएं.

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  8. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को नव वर्ष के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं|

    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मेरी रचना को ब्लाग बुलेटिन में स्थान देने का. ़

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  9. सुन्दर रचना

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ओंकार जी.

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  10. जहां कदम कभी थकते नहीं
    एक दूसरे का पीछे छोड़ने की चाह में
    सांस लेने को भी लोग रुकते नहीं
    ...आज का कटु सत्य...आगे बढ़ने की दौड़ में हम कितना कुछ पीछे छोड़ देते हैं...दिल को छूते बहुत ख़ूबसूरत अहसास और उनकी ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति ...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका कैलाश शर्मा जी.

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  11. बहुत ख़ूब। नव वर्ष की शुभकामनाएँ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका हिमकर जी. आपको भी सपरिवार नववर्ष की शुभकामनाएं.

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  12. भागम भाग में अक्सर ऐसा होता है ... पर रफ़्तार कहाँ प्रेम को समझ पाती है ...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका दिगम्बर सर जी ।

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