Thursday, 17 December 2015

माँ का इंतज़ार


माँ मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है 
पता नही क्यों ?
तू आती है मिल्ती है और 
प्यार भी बहुत करती है 
तुझे मेरी फिक्र भी है 
पर मुझे तेरा इतंज़ार है 
कल कोइ मुझसे पूछ रहा था 
अरे पागल कैसा तेरा ये इतंज़ार है
मैं तुम्हें नहीं बता सकती
बात बरसों पुरानी है 
वो मेरा नन्हा सा मन 
सालों बाद भी; मेरे अंदर 
छुप कर बैठा है 
और सवाल करता है 
अपने आप से बार-बार  
वो सवाल आँखों में 
छुप गया है आँसू बना
होठों पर आते-आते रुक गया है
कुछ मन में फाँस बन चुभ गया है 
तूने मुझे अपने से अलग कर कहा था 
मैं यहाँ खुश रहूंगी 
और तू मुझसे मिलने 
आया करेगी कभी-कभी 
वो कभी-कभी शब्द 
मेरे मन से कभी नहीं निकला 
वो तेरा कहना आया करूँगी 
मेरे लिए इतंज़ार शब्द बन गया 
और वो बचपन का इतंज़ार 
मेरे अदंर डर बना कर ऐसे छुप गया कि
वो कभी ख़ुली हवा में निकला ही नहीं 
और वो इंतज़ार शब्द 
अपाहिज हो गया 
अब वो चल नहीं सकता है 
इसलिए मेरे अंदर से निकल नहीं पाता है ।

चित्र गूगल के माध्यम से 

31 comments:

  1. बेहद खूबसूरत रचना।बहुत खूब।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का सर जी ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का मनोज जी ।

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  3. वो मेरा नन्हा सा मन सालों बाद भी मेरे अंदर छुप कर बैठा है...
    अत्यंत भावपूर्ण रचना जो दिल को छू गई

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप मालती जी


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  4. वो मेरा नन्हा सा मन सालों बाद भी मेरे अंदर छुप कर बैठा है...
    अत्यंत भावपूर्ण रचना जो दिल को छू गई

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  5. बहुत बहुत शुक्रिया आप का मालती जी ।

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  6. भावपूर्ण रचना

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका धीरज कुमार जी.

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  7. इंतज़ार सब्र का इम्तिहान है ..
    मर्मस्पर्शी रचना

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका कविता जी.

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया आप का कविता जी ।

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-12-2015) को "सुबह का इंतज़ार" (चर्चा अंक-2195) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का शास्त्री जी मेरी रचना को चर्चा अंक में स्थान देने का

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  9. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका नीरज जी. ़

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  10. सुन्दर प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ओंकार जी ।

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  11. मैं यहाँ खुश रहूंगी
    और तू मुझसे मिलने
    आया करेगी कभी-कभी
    वो कभी-कभी शब्द

    ..बहुत ख़ूबसूरत...ख़ासतौर पर आख़िरी की पंक्तियाँ....मेरा ब्लॉग पर आने और हौसलाअफज़ाई के लिए शुक़्रिया..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका संजय जी.

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  12. सुंदर भावाभिव्यक्ति

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका हिमकर जी.

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका हिमकर जी.

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  13. मर्मस्पर्शी रचना...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ज्योति जी.

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  14. बेहद भावपूर्ण रचना...बहुत बहुत बधाई...

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  15. बहुत बहुत शुक्रिया आपका प्रसन्न बदन चतुर्वेदी जी.

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  16. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार, कल 14 जनवरी 2016 को में शामिल किया गया है।
    http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमत्रित है ......धन्यवाद !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका संजय जी मेरी रचना को स्थान देने पर.

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