Thursday, 3 December 2015

जब बात सबूतों की चली

तुमने बड़ी खामोशी से लौटाए कदम
पर मेरे दिल पर दस्तक हो ही गई मेरे हमदम 
आते हुए कदमों में एक जोश था
लौटता हुआ हर कदम ख़ामोश था 
वो शिकायतों की गिरह ख़ोल तो देता 
जो तूने अपने मन में बांधी थी
दो लफ़जों में बोल तो देता
नासूर जो तूने बिना वजह पाले
उसकी दवा मुझसे पूछ तो लेता, ओ मतवाले 
चाँद को गवाह बना कर किए थे जो वादे
क्यों भोर होने तक कमज़ोर पड़ गए तेरे इरादे 
तेरी नज़रों का वो धोख़ा था 
वो धुँध में जो साया था 
वो मेरा वजूद था 
वर्षों से मुझमें समाया था 
वो मेरा आत्मसम्मान था 
जो तुझ से टकराया था 
तुम बात सबूतों की मत करो 
कभी अपने गिरहेवांह में भी झाँका करो

29 comments:

  1. वाह ! बहुत ही खूबसूरत रचना। अति सुन्दर रचना।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  2. वाह ! बहुत ही खूबसूरत रचना। अति सुन्दर रचना।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका.

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  4. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-12-2015) को "आईने बुरे लगते हैं" (चर्चा अंक- 2181) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. मेरी रचना को चर्चा अंक में स्थान देने का तहे दिल से शुक्रिया ।

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  6. बहुत सुंदर रचना मधूलिका जी

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का मालती जी ।

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  7. बहुत सुंदर रचना मधूलिका जी

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का मालती जी ।

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  8. सुंदर और भावपूर्ण

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  9. बहुत ही खूबसूरत और भाव विभोर कर देने वाली पंक्तियाँ लिखी है आपने.
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  10. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  11. बहुत सुन्दर रचना

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    1. बहुत धन्यवाद आपका

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  12. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  13. गज़ब का चित्रण है भावों का……………

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    1. This comment has been removed by the author.

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    2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका संजय जी.

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