Wednesday, 7 December 2016

तुझे खोकर



माँ तुझे खोकर तेरी यादों को पाया है
वो चेहरा जो रोज़ नज़र में था
आज दिल में समाया है
ढलती सेहत ने
तुम्हारी नींद कहीं छुपा दी थी
तुम्हें खोकर आज
सारा घर जाग रहा
तुम्हारी नींद बहुत लंबी है
शांत शरीर में बीमारी की थकान नहीं
चिंताओं की माथे पर
कोई शिकन नहीं
वो जिजीविषा शब्द
तुम्हारे रोम रोम से
फूटता था
ईश्वर की मर्ज़ी या तेरे जाने का बहाना
हर बंधन तूने तोड़ दिया
अब तुझे नहीं है वापस आना
अल्मारी में रखी तेरी साड़ी
उसकी तह उस दिन के बाद से
मैंने नहीं खोली है
कि कहीं उड़ न जाए
वो तेरे अहसास की खुशबू
जो मुझे भ्रमित करती है
कि तू कहीं मेरे
आस पास ही है

14 comments:

  1. बहुत मन को छूती हुयी बातें ... माँ हमेशा करीब रहती है ... चाहे यादें बन कर रहे ... दिलासा देती है उसकी हर बात ... हर शै ...

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    1. तहे दिल से शुक्रिया दिग्बर नासवा जी |

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया बेटा :)

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  3. सुंदर भाव-अभिव्यक्ति।लाजवाब प्रस्तुति।

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    1. तहे दिल से शुक्रिया राकेश कुमार जी |

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    1. बहुत बहुत आभारआपका राकेशजी

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  5. अवसर कोई भी हो माँ सबसे पहले याद आती हैं
    बहुत अच्छी हृदयस्पर्शी रचना

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    1. दिल से आभार आपका कविता जी । बस माँ के जाने के बाद कुछ शब्द उनके लिए लिखे थे ।

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  6. मन को छूनेवाली कविता

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    1. बहुत बहुत आभार आपका ओंकार जी ।

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  7. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति।

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  8. दिल से आभार आपका।

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