Saturday, 9 April 2016

मुसाफ़िर


तुम मेरी नज़मो के मुसाफ़िर बन गए हो
आते जाते चंद मुलाकात होती रहती है
पर अब धीरे-धीरे तुमने उस ज़मी को
हथिया लिया है
और इक खूबसूरत सा मकान
बना लिया है
नज़मों की गलियों में
जब तुम नहीं होते
बहुत ख़ामोशी सी छाई रहती है
लफ्जों के दरमियाँ
अब नज़्म चाहती है
तुम्हारी रौनके लगी रहे
ये मकान खाली ना रहे
तुम आओ
हकीकत बन के
तुम्हारी आने की आहट सी न लगे

34 comments:

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " राजनीति का नेगेटिव - पॉज़िटिव " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका मेरी रचना को ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने का ।

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  3. बहुत खूब । दिल के बागीचे में खिली नज्मों की खुशबू ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  4. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 11/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 269 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

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    1. तहे दिल से शुक्रिया आपका मेरी रचना को पांचलिंको का आंनन्द में स्थान देने का ।

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    2. तहे दिल से शुक्रिया आपका मेरी रचना को पांचलिंको का आंनन्द में स्थान देने का ।

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  5. मकान का कोई कोना खाली हो तो उसमें रची-बसी यादें बार-बार आती है .... मन आकुल व्याकुल करती हैं जब तब ...
    बहुत सुन्दर रचना। ..

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  6. मकान का कोई कोना खाली हो तो उसमें रची-बसी यादें बार-बार आती है .... मन आकुल व्याकुल करती हैं जब तब ...
    बहुत सुन्दर रचना। ..

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    1. बहुत बहुत शुकृरिया आपका कविता जी ।

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    2. बहुत बहुत शुकृरिया आपका कविता जी ।

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  7. नज्मों में उनका आना और रुक जाना .... कहीं बोल न उठें नज्में ...
    खूबसूरत ख्याल ...

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    1. बहुत बहुत शुकृरिया आपका दिगम्बर जी।

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  8. मन की भावनाओं ने बड़ी खूबसूरती से शब्दों का आकार लिया। बेहद सुन्दर कविता।

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    1. बहुत बहुत शुकृरिया आपका राजेश जी।

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  9. मन की भावनाओं ने बड़ी खूबसूरती से शब्दों का आकार लिया। बेहद सुन्दर कविता।

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    1. बहुत बहुत शुकृरिया आपका राजेश कुमार जी।

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  10. तुम मेरी नज़मों के मुसाफिर बन गए हो। आपकी यह रचना बहुत ही खूबसूरत पंक्ति से शुरू होती है। बहुत ही बेहतरी ख्याल से ओतप्रोत नज़म।

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  11. तुम मेरी नज़मों के मुसाफिर बन गए हो। आपकी यह रचना बहुत ही खूबसूरत पंक्ति से शुरू होती है। बहुत ही बेहतरी ख्याल से ओतप्रोत नज़म।

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    1. बहुत बहुत शुकृरिया आपका जमशेद आजमी जी ।

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  12. सुन्दर रचना

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    1. बहुत बहुत शुकृरिया आपका ओंकार जी।

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    2. बहुत बहुत शुकृरिया आपका ओंकार जी।

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  13. बहुत सुंदर और भावपूर्ण

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  14. बहुत बहुत शुक्रिया आपका हिमकर जी ।

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  15. बहुत बहुत शुक्रिया आपका राजेश मिश्रा जी ।

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  16. sundar bhaavnaa..beautifully written..
    (www.kaunquest.com)

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।

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  17. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  18. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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