मेरी स्याही के रंग
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कदम
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Thursday, 31 December 2015
मुखौटों का शहर
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तुम इतना तेज मत चलो इतने आगे निकल तो गए हो पर कम से कम पल दो पल तो रुको रुख कर चलने के बीच इतना वक्त तो हो मेरे म...
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Thursday, 3 December 2015
जब बात सबूतों की चली
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तुमने बड़ी खामोशी से लौटाए कदम पर मेरे दिल पर दस्तक हो ही गई मेरे हमदम आते हुए कदमों में एक जोश था लौटता हुआ हर कदम ख़ामोश...
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Wednesday, 24 June 2015
तुम्हारी पहचान
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उस दिन बहुत कोशिश की हमने तुम्हें पहचानने की पर दृष्टि धुँधलाती रही याददाश्त के पृष्टों को पर हम पहचान गए थे तुम्हें ...
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